"Sahaj Kriyayog Sadhna Adhyatmik Trust" Telegram Channel

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"Sahaj Kriyayog Sadhna Adhyatmik Trust" Telegram Channel

Channel address: @rajyogipk
Categories: Uncategorized
Language: Hindi
Country: India
Subscribers: 4,921 (Update date: 2021-10-19)
Description from channel

This channel is parallel branch of Adbhut Rajsik Sadhnayen Youtube channel where we will provide you Gupt sadhna's & Dhyaan Gupt mantras..
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2021-10-17 08:13:26 मुरह ए ख्वातीन

इस पूरी दुनिया में हज़ार किस्म के अम्ल मौजूद होंगे लेकिन सभी के बारे में हर कोई नही जान सकता है कुछ इसी तरह शायद यह अम्ल भी है जो की मुझे मेरे किसी पुराने दस्तावेज़ में मिला.

आप सभी के हजरात के बारे में ज़रूर सुना होगा कैसे इससे लोग अपने काम करवाते हैं किसी नक़्शे , नगीने या नाखून पर बुला के कैसे सारी मालूमात किसी के बारे में करते हैं लेकिन गिनती के ही हजरात ऐसे होंगे जो नाजायज़ काम करें और ईमान से दूर हो जाएँ इसी को देखते हुए कुछ अम्लियों ने मिलके ऐसे तरीके खोजे जिससे या हजरात से सभी तरह के काम ले सकें वरना वो हज़रात सिद्ध कर लें जिससे सारे काम करवाएं जा सकें लेकिन मायूसी ही हाथ लगी इसी तरह से कुछ तांत्रिक भी नाना प्रकार की क्रिया अभ्यास में पूर्ण सफलता नही प्राप्त कर पा रहे थे जिसके बाद कुछ अम्ली और तांत्रिक ने मिल के कुछ तरीके खोज लिए कई सालों के बाद - देखिये 2 जानकार आदमी जब भी साथ होते हैं वहां मज़हब या धर्म की सोच नहीं रहती जैसे जब वैज्ञानिक काम करते हैं तो एक मकसद के लिए करते हैं वहां फजूल नही सोचते हैं उसी तरह तांत्रिक और अम्ली जब काम करते हैं तो ये मज़हब का पर्दा हट जाता है.

अब दोनों ने मिल के कई तरह के निशाचरी विद्या या सिफलि इल्म का अभ्यास रियाज़ किया लेकिन कुछ खास हाथ नही लगा आखीर में एक एक बहुत पुराने दरबारी के पास गए और उनसे पुछा की गलती कहाँ है और उन्होंने उन्हें वह विद्या दे दी जिससे दोनों ने मिलके एक रचना की और जब वह सामने आई तो उसका नाम दिया मुरह ए ख्वातीन और जो जो उन्होंने अपने शागिर्दों को बताया जिससे सभी ने उसे पाया वह सब मैं आप सबको बताने जा रहा हूँ.

यह ख्वातीन अप्सरा यक्षिणी अथवा पिशाचिनी की तरह ही होती हैं लेकिन क्यूंकि ये सिफलि तरह से मिलती है इसलिए सिर्फ इसको पाने के तरीके में कुछ ऐसा है जो इसे पिशाचिनी की तरह बताता है लेकिन इससे कभी नुकसान नही होता है यह जान लें.

ये अपने साधक को हमेशा खुश रखती है हर एक तरह से दौलत शोहरत हर तरह से इसलिए इसको पाना ही सबसे बड़ी जंग है.

ये खवातीन कर्णपिशाचिनी,कामपिशाचिनी और योगिनी का मेल है कैसे यह अपने साधक या तलाशी को वो साईं ख़ुशी देती है जिससे साधक इसे पाने के लिए हमेशा तैयार रहे इनके शरीर की खुशबु ऐसी होगी जो हमेशा साधक को खुश कर दे जैसे होता है की कुछ सुन्दर गंध से सरे दुःख दूर हो जाते हैं

ये अपने साधक को दुनिया के सारी खबर दे देती है कौन मिलने आ रहा है कहाँ से आ रहा है कब आ रहा है क्या सोच के आ रहा जो भी सामने आएगा वह सब बता देगी ये दुनिया में जो भी कहीं भी हो रहा है वो सब बता देती है -

इसकी पैदाइश या जन्म कई हज़ार साल पहले का है तब से आज तक जो भी हुआ है ये सब पता है - जुआ सट्टा शेयर बाज़ार ये सब तो इसके लिए बहुत छोटी बात हो गयी

ये ख्वातीन सामने आती है और अपने साधक को जिस्मानी और रूहानी (शारीरिक एवं आत्मिक) दोनों ही तरह से मुतमइन (संतुष्ट) करती है और इसका पास होना एक अलग ही एहसास है जिसके बाद किसी की भी ज़रूरत नही है

इस ख्वातीन के कई हजरात गुलाम है जो सिफलि है इस तरह से इसको पाने से वह सब भी इसके साथ आपके गुलाम होते हैं.

इसे खुद तो कोई मालूमात नही हैं योग के लेकिन क्यूंकि ये इतने सालों से यहाँ है इसलिए इसे सब पता है की कैसे क्या क्रिया होती है और ये इसने क्यूँ सीखा ये आपको सिद्ध होने के बाद खुद बताएगी

अब एक समझदार साधक खुद से समझ सकता है की इसकी सिद्धि करने वाले को कुछ भी नही चाहिए इसके अलावा.

सिद्धि विधि आदि हेतु अक्टूबर माह भाग 2 का पेड ग्रुप जॉइन करें शुल्क 820 रुपये।

इस साधना के अलावा वहां अनेक साधनाएं क्रिया टोन टोटके भी मिलेंगे।

https://t.me/rajyogipk/5523

संपर्क सूत्र - मनीष जी @sahajst
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2021-10-16 17:02:49 एक दिवस साधना

📿📿📿📿

प्रणाम गुरु जी
आज के लिए प्रशन यह है कि क्या एक दिन मे होने वाली साधनाये भी बाकी साधनाओ की तरह पूर्ण रूप से कार्य करती है या उनकी ऊर्जा का स्तर कम रहता है

उत्तर -
साधनाएं अनेक परिस्थितयों पर निर्भर करती हैं साथ ही साथ साधना नाना प्रकार की होती है और साधना उनकी की संभव है जो प्रकृति में पूर्व उपलब्ध हैं यह आंशिक जानकारी है जो आपको समझनी आवश्यक है क्यूंकि यह सार है.

यह कहना उचित नही होगा की एक दिवस में पूर्ण होने वाली साधना की उर्जा का स्तर कम है अथवा उसके कार्य प्रणाली अथवा क्षमता में कोई कमी होगी क्यूंकि १ दिवस साधना हेतु अनेक प्रकार के मुहूर्त के समूह का चयन किया जाता है जिसमे चन्द्र की स्थितयां आदि देखि जाती हैं ग्रहण , अमावस्या आदि को देखा जाता है इस समय पर अत्रिप्त्ता अपने चरम पर होती है इसलिए कम समय पर सिद्धि मिलना आसन हो हो जाता है और जब मनुष्य किसी १ दिवस की साधना को करता है उससे पूर्व उसे उचित अभ्यास होना भी आवश्यक है अन्य साधना का जिससे वह समय रहते साधना के सभी नियम को पूर्ण कर सके.

अनेक दिवस की साधना में सामान्य नियम एवं सामग्री का प्रयोग किया जाता है १ दिवस की साधना में

नाना प्रकार की सामग्री,
स्थान विशेषता
मुहूर्त
दिशा आसन माला आदि का चयन किया जाता है

जिसके माध्यम से शक्ति का आवाहन प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है और इसके लिए विशेष तरंग की स्थापना होती है इस शरीर एवं सामग्री में जिसे अत्यधिक प्रकृति के उन शक्तिओं के करीब लाया जाता है जिसे मनुष्य समान परिस्थियों में प्रयोग नहीं करता है. जैसे हड्डी शमशान भस्म कब्र की मिट्टी आदि आदि इन सभी के नियमित प्रयोग के माध्यम से साधक उस प्रक्रिया को १ दिवस में पूर्ण कर लेता है जिसे करने में अनेक दिवस लगते हैं.

यदि आप मूलतः देखें तो आप २१ दिन के साधना में प्रत्येक रात्रि यदि ३० मिनट दे रहे हैं तो अपने कुल १०.५ घंटे साधना की जब आप एक दिवस की साधना करते हैं उस समय आप वैसे ही ४ से ५ घंटे लगातार साधना करते हैं जिस कारण से आप एक साथ इतनी शक्तिशाली तरंग उत्पन्न करते हैं जिससे शक्ति उस तरंग के प्रहार से प्रभावित होके अति कम समय में आपके समक्ष प्रस्तुत हो जाती है अतः यह समझना की कम समय में सिद्ध की हुई शक्ति का प्रभावहीन होगी यह गलत है

१ दिक्क़त जो साधक को कम समय की साधना में आती है वह है तरंग को स्थापित करके रखना अर्थात जो तरंग आप २१ दिन में बनांते हैं उसे लगतार अभ्यास से आप शरीर में स्थापित रख पाते हैं लेकिन १ दिवस में शरीर के अत्यधिक प्रभाव से जो तरंग उत्पन्न होती है वह कई बार लम्बे समय तक स्थापित नहीं रह पाती है अथवा वह उस स्थिति में बनी नही रह पाती है जिस कारण से शक्ति की कार्य क्षमता कम होने लगती है और धीरे धीरे विलुप्त हो जाती है इसीलिए अभ्यास आवश्यक है.

कम समय में अधिक का लोभ हमेशा ऋणी करता है वह शक्ति के प्रति हो या व्यक्ति के प्रति.
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2021-10-16 16:40:31 📿📿📿📿

नमस्कार भईया जी

मेरा प्रश्न है जैसे संस्था पुरुषो के लिए शारीरिक ताकत के लिए औषधि बनाती है
वैसे ही महिलाओं के लिए भी औषधि का निर्माण होगा क्या,
जैसे महिलाओं में खून की कमी, शारीरिक दुर्बलता आदि

उत्तर -
महिलाओं के शरीर में हो रही समस्या को मैं स्वयं से समझ सकता हूँ इसी लिए संस्था द्वारा काय मनोहारी का निर्माण किया गया और अन्य औषधि का निर्माण कार्य इया जा रहा है यह विश्व महिला की अनुकम्पा का स्त्रोत है यह प्रकृति स्त्री स्वरुप में दर्शायी जाती है इसलिए महिलाओं का स्वस्थ एवं संतुष्ट रहना आवश्यक है.

काया मनोहारी में अनेक ऐसी दिव्य औषधि का मिश्रण किया गया है जिसके माध्यम से शारीरिक दुर्बलता एवं खून की कमी आदि समस्त समस्या से मुक्ति मिलती है.

जिन कंपनी द्वारा यह दावा बाज़ार में बेचीं जाती है वह सर्वाधिक इसी औषधि को नाना प्रकार की महिलाओं की समस्या में उपयोग करते हैं और सभी को लाभ प्राप्त होता है वह समस्या पीरियड्स से सम्बंधित हो अथवा अन्य किसी भी रक्त विकार अथवा शारीरिक पीड़ा से सम्बंधित हो.

संस्था में उपलब्ध औषधियां मूल्य में अधिक इसी लिए हैं क्यूंकि इसमें पूर्ण समय दिया गया है शोध में और इसमें उपयोग होने वाले औषधि भी दिव्य हैं जिनके माध्यम से महिला के शरीर से सम्बंधित वह बाल झड़ने की समस्या से किसी भी प्रकार की समस्या को सभी से मुक्ति मिलने की पूरण संभवना है.
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2021-10-16 16:28:13 📿📿📿📿

पृणाम गुरदेव। गुरुजी क्या उपासना के दौरान संभोग कर सकते हैं।

उत्तर -
प्रश्न करने से पूर्व प्रश्न के मूल को स्वयं से समझना चाहिए - पूजा, अर्चना, साधना, आराधना, उपासना इससे कहीं अनेक शब्द दिए गये हैं व्याकरण में यह समझें पर्यायवाची शब्द एक दुसरे के विषय में बताते हैं लेकिन अर्थ उनकी भौतिक आत्मिक अथवा क्रिया के अनुसार होते हैं इसीप्रकार उपासना को भी समझाना आवश्यक है और यह व्याख्या सामन्य जन हेतु है क्रियायोग अभ्यासी हेतु नही है.

उपासना को उप + आसन + अ में दर्शया जाता है. उप का अर्थ है निकट , आसन का अर्थ है नियंत्रण - अर्थात उपासना साधना का प्रथम भाग है जब साधक नियंत्रण के निकट है तब वह उपासक है और जब उसे नियंत्रण प्राप्त हो जायेगा तब वह साधक है.

नियंत्रण के निकट होने नियंत्रण खो देने का क्या मूल्य ? जो पौधे चन्दन के निकट होते हैं उनमे चन्दन की गंध समा जाती है इसी प्रकार से साधक जब नियंत्रण के निकट होता है जब उसमे इश्वर की छवि समा जाती है.

सम्भोग एक सीमा तक मनुष्यता की निशानी है लेकिन उसके बाद पाशविक प्रवित्ति. वीर्य का नवीनी करण आवश्यक है लेकिन इसका अर्थ यह नही मनुष्य के मस्तिषक में ही यह कल्पना चलती रहे की कब सांझ हो सूरज ढले और मैं बिस्तर पर जाऊं. यह एक उपासक की अनियंत्रित होने का संकेत है.

इश्वर की भक्ति और पूजा एक ही है ज्ञान को पाना कैसे पान स्वयं को उर्धगामी स्थिति में लाके वह पूजा है. यदि लिंग के अधीन हैं तो वह करें जिसमे आप सकुशल है मेरा आपसे प्रश्न है क्या आप सम्भोग कर सकते हैं ? यदि हाँ तो आप एक बार में ही संतुष्ट हो जायेंगे अनेक सप्ताह के लिए यदि आपको नित प्रतिदिन उत्तेजना हो रही है अर्थात आपने सम्भोग किया ही नही अपने सब कुछ मिनट तक आगे पीछे खुद को धकेलने को सम्भोग समझ लिया है. सम्भोग की सीमा इतनी ही नही है समस्त नाडी में जब सम्भोग की उर्जा व्याप्त हो जाये की अंग के प्रत्येक भाग उसे महसूस करे वह सम्भोग है.
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2021-10-16 09:35:47 प्रश्नोत्तरी - 16-10-2021 आज रात्रि 7 बजे

साधक किसी भी विषय मे प्रश्न करें सामाजिक, मानसिक, आर्थिक, शारीरिक, साधना, एवं क्रियायोग योगनिद्रा ध्यान तंत्र मंत्र यंत्र आदि।

प्रश्न नियम

1. आज समस्त प्रश्न के उत्तर दिए जायेंगे - यहाँ Youtube अथवा Telegram Live Stream विडियो के माध्यम से

2. पूर्ण प्रश्न 1 ही मेसज में लिखें।

3. प्रश्न कोशिश करें कि कम शब्दों में हो, समस्त साधकों के प्रश्नों के उत्तर दिए जा सकें.

4. अपना प्रश्न पूछने के बाद मेसज न करें कि उत्तर दीजिए, ! , ? , यह सब मत भेजिए।

प्रश्न फॉर्मेट -

विषय - आर्थिक , मानसिक जिस भी विषय में आपका प्रश्न है.
मूल प्रश्न

उदाहरण हेतु -

विषय
- योगनिद्रा

नमस्कार, क्या योगनिद्रा के माध्यम से शरीर का त्याग संभव है ?

धन्यवाद.

कारण - जब एक प्रकार से प्रश्न रहते हैं और उन्हें पोस्ट किया जाता है उस समय किसी को भी पढ़ते वक़्त समझ आता है की प्रश्न का मू विषय क्या है.

प्रश्न करने हेतु - @Doccult पर मेसज करे
1.4K viewsDewanshu
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2021-10-15 13:37:19 ख़बबिस साधना अनुभव :-

सर्व प्रथम में श्रीम देवांशु जी और मनीष जी और मयंक जी को प्रणाम और धन्यवाद करता हु। 🙏
में शायद २ साल से संस्था से जुड़ा हूं। मेने बहुत से पोस्ट पढ़े टेलीग्राम ग्रुप में और ज्यादा से ज्यादा पेड़ ग्रुप भी ज्वाइन किए। फिर एक दिन मेने अपनी समस्या देखकर साधना करने का मन बनाया।
जैसे देवांशुजी ने बताया था की अगर कम समय के अंदर कुछ पाना चाहते हो तो तामसिक साधना एवं तंत्र में ही व्यक्ति ज्यादा रुचि रखता है, मेरा भी वो ही हाल था।
शारीरिक, मानसिक और आर्थिक सभी समस्या थी फिर भी देवांशुजी और मनिषजी के मारदर्शन से मेने साधना करने का सोच लिया।
जी हा मेने एक पूर्ण तामसिक साधना की तैयारी की और कैसे भी करके सामग्री मंगवा ली,
प्रथम बार मेरे ज्यादा बोल बोल करने और उतावले स्वभाव के कारण मेने साधना की गुप्तता भंग करदी।
दूसरी बार मेने पूर्ण गुप्तता रखकर साधना की दीक्षा ली और दिए गए मुहूर्त से साधना शुरू की, ये साधना खब्बीस साधना थी।
मेरे पहले दो दिन सामान्य ही रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं, तो मेरे मन में थोड़ा वहम भी था की शायद ये सब जूठ है। पर मेने साधना शुरू रखी। तीसरे दिन शायद आधा माला हुई होगी तब मुझे किसके चिल्लाने की आवाज आई पर मेने आंखे नहीं खोली। ये मेरा प्रथम अनुभव था , फिर मुझे थोड़ा विश्वास हुआ की कुछ तो है। में जहा job करता हु वहा पर भी मुझे किसके होने की भनक लगती रही। ४ दिन जब में साधना कर रहा था तब मुझे लगा की कोई मेरे पास बैठा है और मेरे चहरे के एक दम पास आकर मुझे देख रहा है। पर मेने साधना शुरू रखी और आंख नहीं खोली, पर जब में रात को सोने जा रहा था तब मुझे लगा की किसी ने मुझे पुकारा। पर मुझे मनिष्जी ने कहा था की आपको साधना पे ध्यान देना है अनुभव पे नही, तो मेने वो दिन कुछ हुआ ही नहीं ऐसा सोचकर सो गया।
जब ५ दिन हुआ में हररोज की तरह साधना करने गया तब ४ या ५ बार ही ईलम बोला था उतने में मुझे कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई देने लगी पर फिर भी मेने अपनी साधना जारी रखी, जब मेरा जाप पूर्ण होने आया तब मुझे बहुत ही अजीब बदबू आई और आवाजे आनी बंद हो गई। जब में सोने गया तब मुझे ऐसा लगा की मेरे बिस्तर के पास की कुर्सी में कोई बैठा था।
अगले दिन यानी के ६ दिन किसी गुप्त कारण की वजह से मैं अपनी साधना नहीं कर सका और अपनी साधना खंडित कर बैठा। मुझे बहुत अफसोस हुआ की मेरी साधना अधूरी रह गई।😔
खैर कोई बात नही पर मुझे इस साधना से बहुत कुछ सीखने को मिला है।
में मनीष जी और देवांशुजी का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हु क्योंकि उनके द्वारा मुझे समय समय पर मार्गदर्शन मिलता रहा। मेरी गलती की वजह से साधना सफल नहीं कर पाया पर सीखने को बहुत कुछ मिला।
और एक बात की आज जब में ऑफिस से निकल रहा था तो मुझे आभास हुआ की शायद खब्बिस मेरे पीछे खड़ा है,पर मेने अनदेखा करके ऑफिस लोक करके घर आ गया, उतना ही नही पर वो ही भनक और आवाज जो साधना के दौरान सुनाई दे रही थी वो आज भी रात को मुझे हुई।
अगर मेरे और से अनुभव लिखने में कोई गलती हुई हो तो माफी चाहता हु पर ये मेरी एक रोमांचक साधना रही है।
में देवांशुजी और मनिषजी और संस्था का शुक्र गुजार हु।🙏
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2021-10-14 14:10:17
357 voters706 viewsDewanshu
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2021-10-13 13:54:46
818 viewsDewanshu
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2021-10-11 14:27:30 साधना सामग्री की आवश्यकता नही

रात्री में मात्र ११ बार बोलने से स्वप्न में मिलेंगे सभी उत्तर

यह एक प्रकार की स्वप्नेश्वरी विद्या है जिसे सिद्ध करने वाले साधक को समस्त प्रश्न के उत्तर स्वप्न में अथवा आखें बंद करके मिल जाते हैं (लेकिन अवस्था सुसुप्त हो) अब यह एक ऐसी साधना है जिसमे किसी भी प्रकार की साधना सामग्री की आवश्यकता नही है यह उनके लिए विशेष है जिन्हें निशुल्क साधना की आवश्यकता है मैं चाहता हूँ वह सभी इस साधना को अवश्य करें जिन्होंने निशुल्क साधना की हमेशा मांग की है अथवा इसे अन्य साधक भी कर सकते हैं क्यूंकि इसमें सिर्फ आपका श्रम ही लगेगा अन्य कुछ नही.
इसकी साधना भी सर्वाधिक आसान है.


२१ रात्रि तक सोने से पूर्व २१ बार मंत्र जप करें और सो जाएँ यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा उसके बाद जब भी आवश्यकता हो उस स्थिति में ११ बार मंत्र जप करें और प्रयोग करें इस विद्या का अब इससे आसन एवं कम समय में होने वाली साधना कोई हो ही नही सकती है.

२१ बार मंत्र जप करने में मुश्किल से ५ मिनट लगेंगे २१ दिन में कुल १०५ मिनट की यह साधना है लगभग पौने २ घंटे की.

इस साधना को आप जितनी इक्षा फॉरवर्ड करें अथवा न करें यह आपकी इक्षा है क्यूंकि जितने अधिक लोगों को मंत्र की जानकारी होगी उतनी ज्यादा मंत्र की शक्ति कमज़ोर होगी अब वह आपकी इक्षा है की आपको सुरक्षित रखना है अपने लिए अथवा फोरवर्ड करना है. इसका मंत्र मैं सार्वजानिक रूप से दूंगा.

इस साधना में किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत मदद नही दी जाएगी यह आपको ध्यान देना है की साधना से समबन्धित १ भी प्रश्न संस्था में न पूछें.

इस साधना में

- आपको बिना लहसुन प्याज़ का भोजन करना है (शुद्ध सात्विक भोजन)

- जमीन पर चटाई पर सोना है कुषा की (तकिया चद्दर आदि नही उपयोग करना है)

- मंत्र जप के बाद किसी से बात नही करनी है सीधे सो जाना है.

- पूरे दिन जब अति आवश्यक हो तभी बात करें अनावश्यक न बोले

- २१ दिनों तक झूठ बिलकुल भी न बोले

- पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें तन मन सबसे

मात्र २१ बार ही मंत्र बोलना है रात में १९ अथवा 22 न करे.

स्थान परिवर्तन न करें , धार्मिक स्थल पर न जाएँ, स्त्री का सम्मान करें , गुप्तांग पर नियंत्रण करें किसी भी प्रकार के ऐसी विचार न उत्पन्न करें.

मंत्र - ॐ नमो यक्षिणी आकर्षणी घंटाकरणी महापिशाचिनी मम स्वप्ने दर्शन देहि देहि स्वाहा

मुहूर्त - अमावस्या से शुरू करें.

जो भी व्यक्ति आपसे अपनी समस्या जाहिर करें उसे यह साधना भेज दीजिए यदि और चैनल से जोड़िए।
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